यादगार पलों का वह स्वर्णिम क्षण बहुत क़रीब जैसे जैसे नजदीक आ रहा था बेकरारी बढ़ती जा रही थी…..!
नानपुर में पहली बार बोहरा समाज के धर्मगुरु पधारे
इब्राहिम रिज़वी।✒️
- इतिहास में कभी-कभी ऐसे पल आते हैं जो युगों की दिशा बदल देते हैं। ये क्षण न केवल अतीत की घटनाओं को परिभाषित करते हैं, बल्कि वर्तमान और भविष्य के लिए एक नई नींव भी रखते हैं।
- रविवार को अलीराजपुर जिले का नानपुर इसका साक्षी बना नगर के इतिहास में बोहरा समाज के धर्मगुरु पहली बार यहां पधारे।
सुबह आठ बजे से कुक्षी, बड़वानी, राजपुर,मनावर, धरमपुरी,इंदौर आदि जगहों से बड़ी संख्या में बोहरा समाजजनों के आने का सिलसिला शुरू हो गया।
सुबह 10.30 बजे “इंतज़ार की हर घड़ी अब इतिहास बनने जा रही थी और जिस समय का बरसों से इंतजार था …यादगार पलों का वह स्वर्णिम क्षण बहुत क़रीब जैसे जैसे नजदीक आ रहा था बेकरारी बढ़ती जा रही थी….!
“एक ऐसा पल, जो समय के पन्नों में दर्ज होगा, अब बस कुछ ही क्षण दूर था।” और जैसे ही सय्यदना साहब के काफिले ने नानपुर टोल क्रास कर नानपुर की तरफ़ बढ़े तों
“गरिमा, गौरव और गौरवशाली इतिहास का साक्षी बनने वाला वह क्षण अब सामने आ गया।
नानपुर के बोहरा समाज के महज़ 14 घरों के छोटे – बड़े से लेकर बुजुर्गों के खुशी के मारे पांव जमीन पर नहीं थे क्योंकि जो ख्वाब बरसों से देखा था अब जैसे जैसे साकार होने जा रहा था!
“धड़कनों को तेज़ कर देने वाला वह यादगार पल अब नज़र के सामने हैं “जिस पल का सबको इंतज़ार था, वह अब हक़ीक़त बन गया “उत्साह, सम्मान और उम्मीदों से भरा वह ऐतिहासिक क्षण अब बहुत नज़दीक है।”
समाज के 53 वें धर्मगुरु डॉ सैयदना मुफद्दल सैफुद्दीन साहब की कार ने जैसे ही कस्बे में प्रवेश किया समाजजनों के साथ नागरिकों, जनप्रतिनिधियों ने पुष्प वर्षा कर स्वागत किया।
सय्यदना साहब मर्कज में वाअज के लिए पधारे। सय्यदना साहब ने कहां कि यहां पर कम संख्या मे समाजजन रहते है । यहां कि एक दिकरी जामेआ की विद्यार्थी है। और तीन बेटियों को कुरआन मुखाग्र है। यहां के बेटे भी कुरआन हाफिज हो ।
सय्यदना साहब ने कहा कि नाहने(छोटी) संख्या मे बसने वाले गांव के लिए फख्र की बात है कि तुम्हारी मोहब्बत और इखलास ज्यादा है। कुरआन की हमेशा तिलावत करना हर घर मे एक सदस्य को पुरा कुरआन मुखाग्र हों ऐसी दुआएं है । खुदा तुम्हारी मोहब्बत मे और बरकत अता करे । मौला ने कहां कि ब्याज हराम है ,व्यसन से दूर रहना।
“बाहर से आने वाले समाजजनों के लिए पांडाल में स्क्रीन लगाकर वाअज सुनने का बेहतर इंतजाम किया गया था। वाअज बाद सैयदना साहब यहां पर पधारे और समाजजनों को दीदार का शरफ दिया।
वाअज बाद सैयदना मुफद्दल सैफुद्दीन मौला मुल्ला केजार भाई और वरिष्ठ पत्रकार शफ़क़त दाऊदी के यहां ज्याफत में पहुंचे। आपने वहीं नगर के मीडियाकर्मियों और वरिष्ठ नागरिकों से मुलाकात की । शाम चार बजे आप नानपुर से चांदपुर के लिए तशरीफ़ ले गए।
इसके पूर्व सुबह अलीराजपुर में आपने विदा का बयान किया। सय्यदना साहब ने अपने बयान में फ़रमाया कि हमें अलीराजपुर मा घना तमक्कुन से रहया। परवरदिगार तुम्हारी उम्मीद पुरी करें व्यापार और रोजगार में बरकत अता करें और आपकी मोहब्बत देखकर बहुत खुश हूं आज आप से विदा ले रहा हूं। सय्यदना साहब के विदाई के वक्त माहौल भाव-विह्वल हो गया और समाजजनों की आंखों से आंसू निकल पड़े।