रबी उल अव्वल: रहमत, खुशहाली और सीरत-ए-नबी की याद का महीना

✒️ एम. हामिद ईज्जी, आलोट

इस्लामी हिजरी कैलेंडर का तीसरा महीना रबी उल अव्वल मुस्लिम समाज के लिए विशेष महत्व रखता है। यह महीना पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की पैदाइश की याद से जुड़ा होने के कारण पूरी दुनिया के मुसलमानों के लिए आस्था, प्रेम और खुशी का अवसर माना जाता है।

रबी उल अव्वल को सीरत-ए-नबी, पैगंबर साहब की शिक्षाओं, उनके आदर्श जीवन, रहमत और इंसानियत के संदेश को याद करने का महीना भी कहा जाता है। इस अवसर पर धार्मिक कार्यक्रम, तकरीरें, कुरआन की तिलावत और विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक आयोजन किए जाते हैं।

दाऊदी बोहरा समाज में भी रबी उल अव्वल का विशेष महत्व है। समाज के धर्मगुरु सैयदना मुफद्दल सैफुद्दीन साहब (त.उ.श.) की रहनुमाई में इस अवसर पर धार्मिक एवं सामाजिक गतिविधियों का आयोजन किया जाता है। बड़ी संख्या में समाजजन इन आयोजनों में भाग लेते हैं और इल्म, सीरत तथा धार्मिक शिक्षाओं से जुड़ने का अवसर प्राप्त करते हैं।

12 रबी उल अव्वल और ईद मिलादुन्नबी

रबी उल अव्वल की आमद के साथ ही समाज में खुशी और रौनक का माहौल दिखाई देने लगता है। 12 रबी उल अव्वल को ईद मिलादुन्नबी के रूप में मनाने की परंपरा अनेक मुस्लिम समुदायों में रही है। इस अवसर पर धार्मिक सभाएं, तकरीरें, जुलूस और अन्य कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

रबी उल अव्वल को रहमत और बहार का महीना मानते हुए लोग अपने घरों और मोहल्लों को सजाते हैं। कहीं रोशनी की जाती है तो कहीं धार्मिक कार्यक्रमों के माध्यम से पैगंबर साहब के जीवन और संदेश को लोगों तक पहुंचाया जाता है।

दाऊदी बोहरा समाज में भी इस महीने की अहमियत को लेकर मरहूम मौला डॉक्टर सैयदना मोहम्मद बुरहानुद्दीन साहब (र.अ.) की शिक्षाओं और मार्गदर्शन को विशेष रूप से याद किया जाता है। समाजजनों का मानना है कि ऐसे अवसर धार्मिक भावनाओं के साथ-साथ आपसी प्रेम, भाईचारे और सामाजिक एकता को मजबूत करने का माध्यम भी बनते हैं।

आज आवश्यकता इस बात की है कि रबी उल अव्वल के अवसर पर होने वाले आयोजनों में केवल सजावट और उत्सव तक सीमित न रहकर सीरत-ए-नबी और पैगंबर हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की शिक्षाओं को अपने जीवन में अपनाने का प्रयास भी किया जाए।

रबी उल अव्वल हमें प्रेम, दया, इंसानियत, भाईचारे और नेक आचरण का संदेश देता है। इस पवित्र महीने में हर घर में खुशहाली, आपसी मोहब्बत और बरकत कायम रहे तथा समाज में अमन और भाईचारे का वातावरण बने—यही दुआ है।

रबी उल अव्वल की आमद सभी के लिए रहमत, बरकत और खुशियों का पैगाम लेकर आए।

जुम्मा मुबारक।

दुआओं में याद
मुर्तजा हामिद ईज्जी
आलोट 🌹

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